स्पा का इतिहास, कब, कहां और कैसे हुई इसकी उत्पत्ति?

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इस भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर इतना थक जाता है कि उसे फिर से ऊर्जा की जरूरत होती है। वैसे तो आप घर में आराम करके फिर से तरोताजा महसूस करने लगते हैं लेकिन कई लोग अपनी थकान मिटाने के लिए स्पा जाना पसंद करते हैं। जहां उनके शरीर को सुगंधित औषधीय तेल से स्नान कराया जाता है। फिर शरीर को रिलैक्स देने के लिए मसाज किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह स्पा का चलन आया कहां से? किसने सबसे पहले स्पा का इजाद किया? अगर नहीं तो आइये आज हम आपको बताते हैं कि स्पा थैरेपी दुनिया में सबसे पहले कहां अपनाई गई थी और कहां इसका सबसे पहले इस्तेमाल हुआ था।

स्पा शब्द जल चिकित्सा से जुड़ा हुआ है, जिसे स्नान चिकित्सा के रूप में भी जाना जाता है। स्पा शब्द बेल्जियम के स्पा शहर के नाम से उत्पन्न है। जिसका नाम रोमन काल से जाना जाता है। जब इस जगह को एक्वी स्पाडैनी यानि Aquae Spadanae कहा जाता था जो शायद लैटिन शब्द ‘स्पारगेरे’ से संबंधित था। मध्यकाल में शरीर में आयरन की कमी होने के कारण होने वाली बीमारियों का इलाज केलीबिट ( लोहतत्व युक्त) झरने का पानी पिलाकर किया जाता था। तब इस झरने को एस्पा ( Espa) कहा गया। 16वीं शताब्दी के आते-आते इंग्लैंड में ‘बाथ’ जैसे शहरों में रोमन विचारों को फिर से जीवित किया गया। तब इंग्लैंड के ही इतिहासकारों जिनका नाम विलियम स्लिंग्बाई और डॉ टिमोथी ब्राइट ने एस्पा झहने की फिर से तलाश की जिसको इन लोगों ने बाद में स्पा का नाम दिया।

दुनिया भर में कई लोगों का मानना है कि एक विशेष झरने, कुएं या नदी में स्नान करने से शारीरिक और आध्यात्मिक शुद्धिकरण होता है। अमेरिका के मूल-निवासियों, फारसियों, बेलोनियावासियों मिस्रवासियों, यूनानियों और रोमनों में शुद्धीकरण के अनुष्ठान के विभिन्न रूप मौजूद थे। आज जल के माध्यम से शुद्धीकरण के अनुष्ठान यहूदियों, मुस्लिमों, ईसाइयों, बौद्धों और हिंदुओं के धार्मिक अनुष्ठानों में पाये जाते हैं। ये आयोजन पानी के चिकित्सा और शुद्धिकरण करने के गुणों में प्राचीन विश्वास को दर्शाते हैं।

पश्चिमी स्नान प्रथाओं का कुछ शुरुआती विवरण यूनान से आया है। यूनानियों ने स्नान के नियम शुरू किये, जिसने आधुनिक स्पा प्रक्रियाओं की नींव रखी. इन एजियन लोग ने व्यक्तिगत स्वच्छता के लिए नहाने के छोटे टबों, वाश बेसिनों और पैर स्नान का उपयोग किया। ऐसे प्रारंभिक खोजों में क्रेट के क्नोसोस में महल परिसर में मिले नहाने के उपकरण और सेंटोरिनी के एक्रोटिरी में खुदाई से निकले विलासितापूर्ण एल्‍्बेस्टस बाथटब हैं और दोनों ई.पू.2 सहस्राब्दी के मध्य काल के हैं। उन्होंने अपने व्यायामशाला परिसरों के भीतर थकान उतारने और व्यक्तिगत सफाई के लिए सार्वजनिक स्नानागारों और शॉवरों निर्माण किया। ग्रीक पौराणिक कथाओं में निर्दिष्ट किया गया है कि कुछ प्राकृतिक झरने या ज्वारीय तालाब बीमारी के इलाज के लिए देवताओं की कृपा से बने हैं। इन पवित्र तालाबों के चारों ओर यूनानानियों ने चिकित्सा की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए स्नान की सुविधाएं स्था‍पित की। श्रद्धालु इन स्थलों पर उपचार के लिए देवताओं को प्रसाद चढ़ाते थे और निरोग होने की उम्मीद में नहाते थे।

रोमनों ने कई यूनानी स्नान पद्धतियों की नकल की। रोमन अपने स्नानागारों के आकार-प्रकार और जटिलता में यूनानियों से आगे चले गये। इसके कई कारक रहे:- रोमन शहरों के बड़े आकार और जनसंख्या, कृत्रिम जल प्रणाली बनाने के कारण बहते पानी की उपलब्धता और सीमेंट का आविष्कार, जिससे बड़ी इमारतों का निर्माण आसान, सुरक्षित और सस्ता हो गया। यूनान की तरह रोमन स्नानागार सामाजिक और मनोरंजक गतिविधियों का एक केन्द्र बिंदु बन गये। जैसे-जैसे ही रोमन साम्राज्य का विस्तार हुआ, सार्वजनिक स्नानागार का विचार भूमध्यसागर से सटे सभी हिस्सों और यूरोप और उत्तरी अफ्रीका के क्षेत्रों तक फैल गया। एक्वाडक्ट्स (कृत्रिम जल प्रणाली) निर्माण के साथ रोमनों के पास न केवल घरेलू, कृषि और औद्योगिक उपयोग के लिए बल्कि अवकाश के दौरान मनोरंजक गतिविधियों के लिए भी पर्याप्त पानी होता था। ये एक्वाडक्ट्स पानी प्रदान करते थे, जिसे गरम कर बाद में स्नान के लिए उपयोग किया जाता था। आज यूरोप, अफ्रीका और मध्य-पूर्व में खंडहरों और पुराता‍त्त्वविक खुदाइयों में रोमन युग के स्नान के आकार और स्तर का पता चला है।

बेल्जियम के शहर से उत्तपन्न हुई स्पा की परंपरा आज पूरे विश्व में ना सिर्फ फैल चुकी है बल्कि इसने आधुनिक रूप भी ले लिया है। आज स्पा का इस्तेमान ना सिर्फ बीमारियों को खत्म करने के लिए किया जाता है बल्कि यह शारीरिक सौंदर्य को बढ़ाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। पहले यह परंपरा धनाढ्य और संभ्रांत वर्ग तक सीमित थी लेकिन अब मध्यवर्गीय लोग भी स्पा की राह पकड़ने लगे हैं।

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